चुनाव जीतने पर मोबाइल पाएं अभी रजिस्ट्रेशन कराएं अखिलेश का ‘स्मार्ट’ ऑफर

पब्लिक व्यू ब्युरो 1/1/1900 12:00:00 AM
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विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवाओं को लुभाने के लिए नया दांव चला है। सरकार ने सोमवार को एक बयान जारी कर स्मार्ट फोन वितरण योजना का एलान कर दिया। हालांकि फोन के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। एक जनवरी 2017 को 18 साल की उम्र पूरा करने वाले मैट्रिक पास लोग फोन के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। लाभार्थी की सालाना आमदनी दो लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। समाजवादी स्मार्ट फोन नाम से शुरू इस योजना के लिए एक महीने के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो जाएगा। योजना का एलान करते हुए कहा गया है कि सपा ने समाज के सभी वर्गों में डिजिटल लोकतंत्र लाने का काम किया है। समाजवादी स्मार्ट फोन के जरिये सरकार व जनता के बीच दोतरफा संवाद कायम हो सकेगा। समाजवादी स्मार्ट फोन अत्याधुनिक तकनीक से युक्त अच्छी गुणवत्ता का होगा। इसमें स्मार्ट फोन के सभी फीचर्स के साथ-साथ विस्तृत एकल एप भी उपलब्ध होगा। इसमें राज्य सरकार की योजनाओं के ऑडियो, वीडियो एवं सूचनाएं भी शामिल होंगी। सरकारी नौकरी तो नहीं पा सकेंगे फोन सरकारी नौकरी करने वाले आवेदन नहीं कर सकेंगे। जिनके अभिभावक सरकारी सेवा में हैं तो वे भी पात्र नहीं होंगे। अगर कोई निजी क्षेत्र में कार्यरत है और परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम है, तभी आवेदन कर करेगा। रजिस्ट्रेशन के समय सिर्फ हाईस्कूल के प्रमाण-पत्र की स्कैन कॉपी अपलोड करना जरूरी होगा। कृषि उपज के रेट व मौसम की मिलेगी जानकारी समाजवादी स्मार्ट फोन के एप में किसानों एवं ग्रामीणों के लिए नवीनतम तकनीक, कृषि उत्पादों के वर्तमान बाजार मूल्य के अलावा मौसम की जानकारी भी मिलेगी। इसके अलावा दुग्ध उत्पादकों, विद्यार्थियों व व्यवसाइयों समेत सभी वर्गों की जरूरत के हिसाब से जानकारी रहेगी। कब मिलेगा फोन योजना में लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन होगा। स्मार्ट फोन सीधे लाभार्थी के घर भेजा जाएगा। स्मार्ट फोन का वितरण 2017 की दूसरी छमाही में किया जाएगा। यानी विधानसभा चुनाव के बाद। योजना का संदेश साफ है कि सपा को जिताओ, स्मार्ट फोन पाओ।

चुनाव जीतने पर मोबाइल पाएं अभी रजिस्ट्रेशन कराएं अखिलेश का ‘स्मार्ट’ ऑफर

पब्लिक व्यू ब्युरो 1/1/1900 12:00:00 AM
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विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवाओं को लुभाने के लिए नया दांव चला है। सरकार ने सोमवार को एक बयान जारी कर स्मार्ट फोन वितरण योजना का एलान कर दिया। हालांकि फोन के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। एक जनवरी 2017 को 18 साल की उम्र पूरा करने वाले मैट्रिक पास लोग फोन के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। लाभार्थी की सालाना आमदनी दो लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। समाजवादी स्मार्ट फोन नाम से शुरू इस योजना के लिए एक महीने के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो जाएगा। योजना का एलान करते हुए कहा गया है कि सपा ने समाज के सभी वर्गों में डिजिटल लोकतंत्र लाने का काम किया है। समाजवादी स्मार्ट फोन के जरिये सरकार व जनता के बीच दोतरफा संवाद कायम हो सकेगा। समाजवादी स्मार्ट फोन अत्याधुनिक तकनीक से युक्त अच्छी गुणवत्ता का होगा। इसमें स्मार्ट फोन के सभी फीचर्स के साथ-साथ विस्तृत एकल एप भी उपलब्ध होगा। इसमें राज्य सरकार की योजनाओं के ऑडियो, वीडियो एवं सूचनाएं भी शामिल होंगी। सरकारी नौकरी तो नहीं पा सकेंगे फोन सरकारी नौकरी करने वाले आवेदन नहीं कर सकेंगे। जिनके अभिभावक सरकारी सेवा में हैं तो वे भी पात्र नहीं होंगे। अगर कोई निजी क्षेत्र में कार्यरत है और परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम है, तभी आवेदन कर करेगा। रजिस्ट्रेशन के समय सिर्फ हाईस्कूल के प्रमाण-पत्र की स्कैन कॉपी अपलोड करना जरूरी होगा। कृषि उपज के रेट व मौसम की मिलेगी जानकारी समाजवादी स्मार्ट फोन के एप में किसानों एवं ग्रामीणों के लिए नवीनतम तकनीक, कृषि उत्पादों के वर्तमान बाजार मूल्य के अलावा मौसम की जानकारी भी मिलेगी। इसके अलावा दुग्ध उत्पादकों, विद्यार्थियों व व्यवसाइयों समेत सभी वर्गों की जरूरत के हिसाब से जानकारी रहेगी। कब मिलेगा फोन योजना में लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन होगा। स्मार्ट फोन सीधे लाभार्थी के घर भेजा जाएगा। स्मार्ट फोन का वितरण 2017 की दूसरी छमाही में किया जाएगा। यानी विधानसभा चुनाव के बाद। योजना का संदेश साफ है कि सपा को जिताओ, स्मार्ट फोन पाओ।

हिट एंड रन केस , बचा हुआ सच

पब्लिक व्यू, ब्यूरो 1/1/1900 12:00:00 AM
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हिट एंड रन में घायल हुए गोंडा के मुस्लिम शेख और अब्दुल्ला शेख की पीड़ा कम नहीं है। सलमान खान तो भले ही बरी हो गए हों पर हादसे के बाद इन्हें कोई मदद नहीं मिली, नौकरी तक छूट गई। यहीं नहीं, वहां से जान के भी लाले पड़ गए इसलिए मुंबई को अलविदा कहना पड़ा। अब वे गांव में किसी तरह मजदूरी व खेती किसानी से गुजारा करते हैं। कोतवाली देहात क्षेत्र के भरहापारा के मुस्लिम शेख तो बृहस्पतिवार को घर पर नहीं मिले पर उनके वालिद नियामत ने बताया कि बेटा पास के गांव में गया है। वे बताते हैं, हादसे के बाद मुस्लिम के इलाज में काफी पैसे खर्च हो गए, लेकिन सहायता के नाम पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला। वे अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहते हैं कि उनके बेटे की जान को खतरा हो गया था, इसलिए उसे मुंबई छोड़ना पड़ा। अब यहां खेती-किसानी कर परिवार संभाल रहा है। वहीं, अशरफ खेड़ा के रहने वाले अब्दुल्ला भी जान जाने के डर से मुंबई छोड़कर अपने घर लौट आए। उनके पिता ने बताया कि बेटे को न सलमान ने किसी प्रकार की सहायता दी न ही सरकार की ओर से कोई स‌ुविधा मिली।सलमान खान की गाड़ी से ड्राईविंग के दौरान घायल कोतवाली देहात क्षेत्र के असरफखेड़ा गांव के रहने वाले अब्दुल्ला की पत्नी रेशमा ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहा कि जब वक्त बुरा आता है तो साया भी साथ छोड़ देता है, बुरे वक्त में किसी ने साथ नहीं दिया, जो अजीज हुआ करते थे, वह भी कतराने लगे थे। मगर धीरे-धीरे समय के साथ ही सबकुछ ठीक हो गया अब वह अपने परिवार के साथ खुशहाल है। हादसे में घायल पीडि़त मन्नू के परिवार की एक महिला ने बताया कि हादसें के बाद इलाज के लिए किसी ने सहायता नहीं की। किसी तरह परिवार के लोगों ने मिलकर इलाज कराया। कोर्ट से एक उम्मीद थी कि फैसला आने के साथ ही कोर्ट से सभी पीडि़तों के साथ ही मन्नू को भी सहायता मिलेगी। मगर कोर्ट के फैसले से आस टूट गई। अब मजदूरी और किसानी के सहारे जिन्दगी चलेगी। हिट एंड रन केंस में जख्मी हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वे अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, पर वे उच्चतम न्यायालय में अपील नहीं करेंगे। लखनऊ आए अब्दुल्ला ने अमर उजाला बातचीत में कहा कि अदालत ने सलमानी की सुनी अब हमारी भी सुनें। उन्होंने कहा कि आखिरी आस अब सलमान से है उनसे मुलाकात की कोशिश करूंगा। अगर वो आर्थिक मदद करेंगे तो ठीक है वरना मेरी किस्मत। वे कहने लगे कि हादसे ने मेरी दुनिया ही बदल दी। जिस बेकरी में नौकरी करता था वहां पुलिस व पत्रकारों का जमावड़ा लगने लगा, लिहाजा सेठ ने नौकरी से निकाल दिया। अब कहीं और नौकरी मांगने जाव तो टूटी टांग आड़े आती थी। गोंडा में भी रोजगार नहीं मिला। मुझे उम्मीद थी कि सलमान के वकील मुझसे संपर्क करके कुछ सुलह समझौते की बात करेंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। हां, यह सच जरूर है कि डेढ़ महीने अस्पताल में रहने के दौरान मेरा एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ, किसने पैसे दिए मैंने नहीं जानता।जिस ड्राइवर अशोक सिंह की गवाही से सलमान खान का पक्ष मजबूत हुआ, वह गोंडा का रहने वाला है। अशोक ने ही 12 साल बाद कोर्ट में गवाही दी थी कि वारदात वाले दिन गाड़ी सलमान नहीं, वह खुद चला रहा था। वजीरगंज के बड़ा दरवाजा का रहने वाला अशोक सिंह राना की 25 साल पहले मुंबई के जुहू चौपाटी में अदाकारा हेलन से मुलाकात हुई थी और वे उनके घर काम करने लगे। बाद में सलमान के यहां ड्राइवर बन गए। बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला प्रतिनिधि अशोक के घर पहुंचा तो वह वहां मौजूद नहीं था। अशोक के बड़े भाई रामप्रताप ने बताया कि खुद को कामयाबी से जोड़ने के लिए अशोक 25 साल पहले 1989 में मुंबई पहुंच गया। काफी समय तक काम नहीं मिला तो वह जुहू चौपाटी पर गुब्बारा बेचने लगा।एक दिन मशहूर एक्ट्रेस हेलन उनकी दुकान पर गुब्बारा लेने पहुंच गईं। अशोक के सरल स्वभाव से प्रभावित होकर उन्हें अपने साथ ले गईं। इसी बीच, उनके सौतेले बेटे सलमान ने अशोक को अपने साथ रख लिया। बकौल राम प्रताप, हादसे में एक की मौत के बाद जब मुंबई पुलिस ने केस फाइल किया तो अशोक को गवाह बनाया। जब उनसे पूछा गया कि अशोक ने आखिर 12 साल बाद गाड़ी खुद चलाने का बयान क्यों दिया तो रामप्रता ने कहा कि उन्हें इसकी विशेष जानकारी नहीं। इस बारे में अशोक ही बता सकते हैं। रामप्रताप ने अशोक से बात करने के लिए फोन मिलाया तो उसका मोबाइल स्विच आफ मिला।

हिट एंड रन केस , बचा हुआ सच

पब्लिक व्यू, ब्यूरो 1/1/1900 12:00:00 AM
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हिट एंड रन में घायल हुए गोंडा के मुस्लिम शेख और अब्दुल्ला शेख की पीड़ा कम नहीं है। सलमान खान तो भले ही बरी हो गए हों पर हादसे के बाद इन्हें कोई मदद नहीं मिली, नौकरी तक छूट गई। यहीं नहीं, वहां से जान के भी लाले पड़ गए इसलिए मुंबई को अलविदा कहना पड़ा। अब वे गांव में किसी तरह मजदूरी व खेती किसानी से गुजारा करते हैं। कोतवाली देहात क्षेत्र के भरहापारा के मुस्लिम शेख तो बृहस्पतिवार को घर पर नहीं मिले पर उनके वालिद नियामत ने बताया कि बेटा पास के गांव में गया है। वे बताते हैं, हादसे के बाद मुस्लिम के इलाज में काफी पैसे खर्च हो गए, लेकिन सहायता के नाम पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला। वे अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहते हैं कि उनके बेटे की जान को खतरा हो गया था, इसलिए उसे मुंबई छोड़ना पड़ा। अब यहां खेती-किसानी कर परिवार संभाल रहा है। वहीं, अशरफ खेड़ा के रहने वाले अब्दुल्ला भी जान जाने के डर से मुंबई छोड़कर अपने घर लौट आए। उनके पिता ने बताया कि बेटे को न सलमान ने किसी प्रकार की सहायता दी न ही सरकार की ओर से कोई स‌ुविधा मिली।सलमान खान की गाड़ी से ड्राईविंग के दौरान घायल कोतवाली देहात क्षेत्र के असरफखेड़ा गांव के रहने वाले अब्दुल्ला की पत्नी रेशमा ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहा कि जब वक्त बुरा आता है तो साया भी साथ छोड़ देता है, बुरे वक्त में किसी ने साथ नहीं दिया, जो अजीज हुआ करते थे, वह भी कतराने लगे थे। मगर धीरे-धीरे समय के साथ ही सबकुछ ठीक हो गया अब वह अपने परिवार के साथ खुशहाल है। हादसे में घायल पीडि़त मन्नू के परिवार की एक महिला ने बताया कि हादसें के बाद इलाज के लिए किसी ने सहायता नहीं की। किसी तरह परिवार के लोगों ने मिलकर इलाज कराया। कोर्ट से एक उम्मीद थी कि फैसला आने के साथ ही कोर्ट से सभी पीडि़तों के साथ ही मन्नू को भी सहायता मिलेगी। मगर कोर्ट के फैसले से आस टूट गई। अब मजदूरी और किसानी के सहारे जिन्दगी चलेगी। हिट एंड रन केंस में जख्मी हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वे अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, पर वे उच्चतम न्यायालय में अपील नहीं करेंगे। लखनऊ आए अब्दुल्ला ने अमर उजाला बातचीत में कहा कि अदालत ने सलमानी की सुनी अब हमारी भी सुनें। उन्होंने कहा कि आखिरी आस अब सलमान से है उनसे मुलाकात की कोशिश करूंगा। अगर वो आर्थिक मदद करेंगे तो ठीक है वरना मेरी किस्मत। वे कहने लगे कि हादसे ने मेरी दुनिया ही बदल दी। जिस बेकरी में नौकरी करता था वहां पुलिस व पत्रकारों का जमावड़ा लगने लगा, लिहाजा सेठ ने नौकरी से निकाल दिया। अब कहीं और नौकरी मांगने जाव तो टूटी टांग आड़े आती थी। गोंडा में भी रोजगार नहीं मिला। मुझे उम्मीद थी कि सलमान के वकील मुझसे संपर्क करके कुछ सुलह समझौते की बात करेंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। हां, यह सच जरूर है कि डेढ़ महीने अस्पताल में रहने के दौरान मेरा एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ, किसने पैसे दिए मैंने नहीं जानता।जिस ड्राइवर अशोक सिंह की गवाही से सलमान खान का पक्ष मजबूत हुआ, वह गोंडा का रहने वाला है। अशोक ने ही 12 साल बाद कोर्ट में गवाही दी थी कि वारदात वाले दिन गाड़ी सलमान नहीं, वह खुद चला रहा था। वजीरगंज के बड़ा दरवाजा का रहने वाला अशोक सिंह राना की 25 साल पहले मुंबई के जुहू चौपाटी में अदाकारा हेलन से मुलाकात हुई थी और वे उनके घर काम करने लगे। बाद में सलमान के यहां ड्राइवर बन गए। बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला प्रतिनिधि अशोक के घर पहुंचा तो वह वहां मौजूद नहीं था। अशोक के बड़े भाई रामप्रताप ने बताया कि खुद को कामयाबी से जोड़ने के लिए अशोक 25 साल पहले 1989 में मुंबई पहुंच गया। काफी समय तक काम नहीं मिला तो वह जुहू चौपाटी पर गुब्बारा बेचने लगा।एक दिन मशहूर एक्ट्रेस हेलन उनकी दुकान पर गुब्बारा लेने पहुंच गईं। अशोक के सरल स्वभाव से प्रभावित होकर उन्हें अपने साथ ले गईं। इसी बीच, उनके सौतेले बेटे सलमान ने अशोक को अपने साथ रख लिया। बकौल राम प्रताप, हादसे में एक की मौत के बाद जब मुंबई पुलिस ने केस फाइल किया तो अशोक को गवाह बनाया। जब उनसे पूछा गया कि अशोक ने आखिर 12 साल बाद गाड़ी खुद चलाने का बयान क्यों दिया तो रामप्रता ने कहा कि उन्हें इसकी विशेष जानकारी नहीं। इस बारे में अशोक ही बता सकते हैं। रामप्रताप ने अशोक से बात करने के लिए फोन मिलाया तो उसका मोबाइल स्विच आफ मिला।

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