आज फिर होगी चर्चा,जीएसटी में राज्यों की क्षतिपूर्ति के लिए राजस्व की परिभाषा तय

पब्लिक व्यू ब्यूरो 10/18/2016 10:52:29 PM
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जीएसटी प्रणाली के बारे में फैसला लेने वाली शीर्ष कमेटी जीएसटी काउंसिल की मंगलवार से यहां शुरू हुई तीसरी बैठक के पहले दिन राज्यों की क्षतिपूर्ति के लिए राजस्व की परिभाषा तय हो गई। इसमें क्षतिपूर्ति के लिए आधार वर्ष 2015-16 तय हुआ। बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री एवं जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष, अरुण जेटली ने बताया कि जीएसटी लागू होने की सूरत में राज्यों को जो क्षतिपूर्ति की जाएगी, उसके लिए राजस्व की परिभाषा सर्वसम्मति से तय हो गई है। उन्होंने बताया कि क्षतिपूर्ति के लिए आधार वर्ष 2015-16 निर्धारित किया गया। हर साल क्षतिपूर्ति की राशि देने में राजस्व में वृद्घि के लिए क्या फॉर्मूला तय हो, इसके लिए पांच-छह विकल्पों पर चर्चा हुई। उसके बाद सर्वसम्मति से तय हुआ कि सालाना 14 फीसदी की सेक्युलर ग्रोथ रेट को राज्यों की संभावित विकास दर माना जाए। उन्होंने बताया कि अभी तक काउंसिल की तीन बैठकों में जो भी फैसला हुआ, सभी सर्वसम्मति से लिये गए हैं। आगे भी जो भी फैसले लिये जाएंगे, वे भी सर्वसम्मति से ही होंगे। जीएसटी प्रणाली से किसी भी राज्य के बाहर रहने की चर्चा पर विराम लगाते हुए कहा गया कि यह प्रणाली सभी राज्यों में लागू होगी। जेटली ने रेवेन्यू मॉडल पर कहा कि केंद्र के पास आय के स्रोत ऐसे होने चाहिए ताकि वह राज्यों को क्षतिपूर्ति करने लायक रकम जमा कर सके। उनका मतलब आमदनी के स्रोत में केंद्र की अधिकता को लेकर था। जीएसटी की दरों को तय करने पर मंगलवार को चर्चा शुरू हुई लेकिन शाम तक यह पूरी नहीं हो पाई। इस पर बुधवार को भी चर्चा जारी रहेगी। पिछली बैठक में जीएसटी नियमों को मिली थी मंजूरी उल्लेखनीय है कि जीएसटी काउंसिल की अभी तक दो बैठकें हो चुकी हैं। पिछली बैठक में जीएसटी नियमों को मंजूरी दे दी गई थी। उसी बैठक में जीएसटी काउंसिल ने 5 ड्राफ्ट नियम मंजूर किए थे। इसके तहत करदाता को 3 दिन में रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा। उसी बैठक में टैक्स छूट पर अहम फैसला लिया गया था, जिसके तहत अगर जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स छूट जारी रही तो केंद्र और राज्य सरकार बजट से भरपाई करेंगे। पिछली बैठक में सर्विस टैक्स के बंटवारे को लेकर मतभेद कायम रहे थे और इसको लेकर पिछले बैठक के फैसले को मंजूरी नहीं मिली थी। राज्य सरकार सर्विस टैक्स देने वालों पर भी नियंत्रण चाहती है, जबकि पहली बैठक में सभी सर्विस टैक्स के सभी असेसी को केंद्र के अधीन लाने का फैसला लिया गया था। जीएसटी परिषद में संभावित जीएसटी दर पर भी चर्चा हुई, जिसमें 6, 12, 18 और 26 फीसदी वाली चार स्लैब की संरचना शामिल है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से कहा कि बैठक के पहले दिन जीएसटी दर की संरचना के पांच विकल्पों पर चर्चा हुई। कोई फैसला हालांकि नहीं हो पाया। चर्चा बुधवार को भी जारी रहेगी। खाद्य वस्तुओं को कर से छूट देने का प्रस्ताव है। आम उपयोग के 50 फीसदी जिंसों को भी कर से छूट देने का प्रस्ताव है, ताकि महंगाई काबू में रहे। आवश्यक वस्तुओं पर कम दर रखी जाएगी। बेहद लक्जरी की श्रेणी में आने वाले उत्पादों तथा अहितकर वस्तुओं मसलन तंबाकू, सिगरेट, एरेटेड ड्रिंक्स, लक्जरी कारों तथा प्रदूषण फैलाने वाले उत्पादों पर 26 प्रतिशत की जीएसटी दर के साथ अतिरिक्त उपकर लगाने का भी प्रस्ताव है। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के बैनर तले उत्पादकों, निर्यातकों और उद्योग संघों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने जीएसटी व्यवस्था में हस्तशिल्प क्षेत्र से संबंधित एक याचिका सौंपी। इसके साथ ही जीएसटी में हस्तशिल्प उद्योग को छूट की मांग भी की गई। वित्तमंत्री ने आश्वासन दिया कि जीसीटी में हस्तशिल्प क्षेत्र के हितों की रक्षा की जाएगी। परिषद के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना। ईपीसीएच के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि जेटली ने परिषद के प्रतिनिधियों के साथ उनके क्षेत्र के उत्पादों और उसके विकास की संभावनाओं पर अलग-अलग बात भी की।

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