ऊं की आवाज,भारत-चीन सीमा पर मौजूद इस सरोवर की लहरों से आती है

पब्लिक व्यू ब्यूरो 10/18/2016 11:43:50 PM
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विश्व प्रसिद्ध कैलास-मानसरोवर यात्रा 1981 से शुरू हुई। यह यात्रा अपने धार्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। कैलास मानसरोवर यात्रा अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भारत और चीन से होकर गुजरता है। कैलास क्षेत्र को स्वंभू कहा गया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप के चारों और पहले समुद्र था। इसके रूस से टकराने से हिमालय का निर्माण हुआ। यहां जाने वाले लोगों का कहना है कि इस अलौकिक जगह पर प्रकाश तरंगों और ध्वनि तरंगों का समागम होता है, जिससे ऊं की आवाज आती है। कैलास पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चिम को रूबी और उत्तर को स्वर्ण रूप में माना जाता है। कैलास मानसरोवर कई धर्मों- तिब्बती बौद्ध, सभी देशों के बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दूओं का आध्यात्मिक केन्द्र है। तिब्बतियों की मान्यता है कि वहां के एक संत कवि ने वर्षों गुफा में रहकर तपस्या की थी। कैलास पर स्थित बुद्ध भगवान का अलौकिक रूप डेमचौक बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए पूजनीय है। जैनियों का मानना है कि आदिनाथ ऋषभदेव का यह निर्वाण स्थल अष्टपद है।हिन्दू धर्म के अनुयायियों की मान्यता है कि कैलास पर्वत मेरू पर्वत है जो ब्राह्मंड की धूरी है और यह भगवान शंकर का प्रमुख निवास स्थान है। यहां देवी सती के शरीर का दांया हाथ गिरा था। कुछ लोगों का मानना यह भी है कि गुरु नानक देव जी ने भी यहां कुछ दिन रुककर ध्यान किया था। इसलिए सिखों के लिए भी यह पवित्र स्थान है। एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार यह जगह कुबेर की नगरी है। यहीं से महाविष्णु के करकमलों से निकलकर गंगा कैलास पर्वत की चोटी पर गिरती है, जहां प्रभु शिव उन्हें अपनी जटाओं में भरकर धरती में निर्मल धारा के रूप में प्रवाहित करते हैं।

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